

लंबे संघर्ष के बाद अदालत का बड़ा आदेश, तत्कालीन जनपद पंचायत CEO समेत 9 लोगों पर FIR के निर्देश:केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल एवं कॉलेज में अहाता निर्माण का मामला, 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता मामले में कार्यवाही
अम्बिकापुर। केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल एवं कॉलेज में अहाता निर्माण कार्य से जुड़ी 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में अदालत ने तत्कालीन जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) समेत 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश सामाजिक कार्यकर्ता अभय नारायण पांडे की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है।
मामले में निर्माण कार्य, स्वीकृत राशि, भुगतान, माप पुस्तिका, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के दौरान वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का निर्देश दिया है।
मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी और 34 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत भी कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल एवं कॉलेज परिसर में अहाता निर्माण के लिए स्वीकृत और खर्च की गई राशि को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। दस्तावेजों की जांच में निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति, भुगतान प्रक्रिया, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र से जुड़े बिंदुओं पर आपत्तियां सामने आईं। आरोप है कि सरकारी राशि के उपयोग में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
यह भी आरोप है कि निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए वित्तीय नियमों की अनदेखी की। इन्हीं आरोपों के आधार पर अदालत ने संबंधित सभी लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है।
इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अभय नारायण पांडे ने लंबे समय तक संघर्ष किया। शिकायतों और जांच के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर अब FIR दर्ज करने का आदेश जारी किया गया है।
अदालत के निर्देश के बाद पुलिस को आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू करनी होगी। जांच के दौरान निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेज, भुगतान अभिलेख, बैंक लेन-देन, तकनीकी रिपोर्ट, माप पुस्तिका, निविदा प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी।
मामले में सरकारी राशि की वसूली और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है। यदि विवेचना में राशि के गबन, फर्जी दस्तावेज, मिलीभगत या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
Author: Chhattisgarhiya News
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