

सेदम ग्रामीण बैंक में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के नाम पर कथित फर्जी लोन का आरोप, डेढ़ लाख रुपये की वापसी के लिए भटक रहीं महिलाएं
कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत, फर्जी हस्ताक्षरों से ऋण निकालने का आरोप; जिम्मेदारों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
बतौली, सरगुजा। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पोकसरी में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के नाम पर कथित तौर पर फर्जी तरीके से लोन निकालने का मामला सामने आया है। ग्रामीण बैंक शाखा सेदम से जुड़े इस मामले में पवन स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने डेढ़ लाख रुपये का ऋण उनकी जानकारी और सहमति के बिना निकाले जाने का आरोप लगाया है। महिलाओं ने 6 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत सौंपकर राशि वापस दिलाने और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
फर्जी हस्ताक्षर कर लोन निकालने का आरोप
कलेक्टर को दिए गए आवेदन के अनुसार, पवन स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष अमिला, सचिव अलमा और अन्य सदस्य ग्राम पोकसरी, थाना बतौली, जिला सरगुजा की निवासी हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समूह के बैंक खाते से संबंधित लोन खाता क्रमांक 77100051664 के माध्यम से 1,50,000 रुपये का ऋण निकाला गया, जबकि समूह की महिलाओं का दावा है कि उन्होंने इसके लिए हस्ताक्षर नहीं किए थे।
महिलाओं ने ग्रामीण बैंक शाखा सेदम के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और ग्राम पोकसरी निवासी भुनेश्वरी सिदार पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उनके हस्ताक्षरों का कथित रूप से दुरुपयोग कर ऋण की राशि निकाली गई।
पैसा वापस करने का आश्वासन, फिर भी नहीं मिली राहत
शिकायत में महिलाओं ने बताया है कि जब उन्हें लोन निकाले जाने की जानकारी मिली, तो उन्होंने संबंधित महिला से पूछताछ की। आवेदन के मुताबिक, महिला ने बैंक मैनेजर के साथ मिलकर पैसा निकालने की बात स्वीकार करते हुए राशि वापस करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें अब तक राशि वापस नहीं मिली है।
महिलाओं के अनुसार, तत्कालीन बैंक मैनेजर का स्थानांतरण हो चुका है। वर्तमान शाखा प्रबंधक से संपर्क करने पर भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। उनका आरोप है कि उन्हें ही लोन की राशि जमा करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतों और जांच के बाद भी समाधान का इंतजार
समूह की महिलाओं का कहना है कि वे पहले भी इस मामले में शिकायत कर चुकी हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली है। महिलाओं को उम्मीद है कि कलेक्टर जनदर्शन में दिए गए आवेदन के बाद मामले की निष्पक्ष जांच होगी और उन्हें न्याय मिलेगा।
वहीं, विभागीय स्तर पर पहले की गई जांच के संबंध में डीपीएम सुभाष मिश्रा की ओर से संबंधित महिला को निलंबित करने और रिकवरी की कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस कार्रवाई का पवन स्वयं सहायता समूह के मामले से क्या संबंध है, कितनी राशि की वसूली हुई है और शिकायतकर्ता महिलाओं को उनकी कथित बकाया राशि कब वापस मिलेगी।
आखिर निगरानी करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका क्या है?
इस मामले ने स्वयं सहायता समूहों के नाम पर ऋण जारी करने की प्रक्रिया और उसकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि महिलाओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जांच जरूरी है कि ऋण जारी करने से पहले दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का सत्यापन कैसे किया गया तथा राशि किसे दी गई।
सवाल यह भी है कि समूह की महिलाओं की सहमति के बिना ऋण जारी होने की आशंका के बावजूद उन्हें भुगतान की जिम्मेदारी क्यों उठानी पड़ रही है? क्या संबंधित बैंकिंग प्रक्रिया की जांच की गई है? निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही और अब तक महिलाओं को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम हैं। ऐसे में समूहों के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।
कब मिलेगा महिलाओं को न्याय?
पवन स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब अपने नाम पर कथित रूप से निकाले गए डेढ़ लाख रुपये के लोन की राशि वापस दिलाने और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और बैंक प्रबंधन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के नाम पर कथित फर्जी लोन की निष्पक्ष जांच होगी, जिम्मेदारों की भूमिका तय होगी और महिलाओं को उनका पैसा वापस मिल पाएगा?
Author: Chhattisgarhiya News
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